आज का विषय था गर्कलेपन में जो सीखा वो कोई और सिखा नहीं सकता।
यह बात बिल्कुल सही है ।शुरू शुरू में हमें लगता है कि हम अकेले कुछ भी नहीं कर सकते ।हर समय हमें लोगों के साथ की जरूरत पड़ती रहती है ,लेकिन जब कभीबैदी परिस्थिति आती है जब हमें ही अकेले उसका समाधान निकालना पड़ता है ।
तब हमें अपने ऊपर विश्वास होता है।सही गलत की पहचान होती है ।अपने परायों की पहचान होती है।
रहीम दास जी का दोहा बिलकुल सटीक बैठता है
"रहिमन विपदा हूँ भली जो थोड़े दिन होय
जानी परत सब जग में अपनो परायों कोय"
तो खुद को पहचानना है तो सबसे अच्छा साथी है अकेलापन