🌹अधूरा इश्क़ 🌹
इतनी मोहब्बत न सिखा ऐ खुदा,
कि खुद से ज़्यादा कोई और हो जाए,
दिल टूटे अगर कभी उसका,
तो दर्द मेरी पहचान बन जाए…
राधा को रोता छोड़ गए थे “कान्हा”,
मीरा को भी कहाँ मिल पाए थे “मोहन”,
राधा का प्रेम आज भी अधूरा है,
मीरा का इश्क़ मगर गहरा और पावन…
प्यार जिस्मों का मोहताज नहीं होता,
ये तो रूह से रूह का अफ़साना है,
जिसे लोग पूरा समझ लेते हैं,
वो इश्क़ अक्सर अधूरा ही सुहाना है…
सात वचनों के बंधन में बंधकर,
हर रिश्ता निभाया नहीं जाता,
रिश्ता वही सच्चा कहलाता है,
जिसमें खुद से पहले दूसरे को चाहा जाता…
कभी वचन टूट भी जाएँ अगर,
तो मोहब्बत कम नहीं होती,
क्योंकि सच्चा प्रेम वही है—
जो अधूरा होकर भी हमेशा पूरा होता है…
👉 संदेश (Moral):
सच्चा प्यार पाना नहीं, निभाना सिखाता है।
रिश्तों की पवित्रता विश्वास, सम्मान और त्याग से बनी रहती है।
जो प्रेम किसी का घर तोड़े नहीं,
बल्कि टूटे दिलों को जीना सिखाए—
वही प्रेम सबसे पावन कहलाता है…