
लगे रहो तुम कर लोगे, माना थोड़ी मुश्किल होगी,
झूठी हर एक महफ़िल होगी, नींद का सौदा करना होगा,
अकेलापन भी सहना होगा, लगे जैसे थके हुए हैं,
सब निकल गए हम रुके हुए हैं,
वो कुछ ना कर पाने का डर, पीछे रह जाने का डर,
इस डर में तुम खुद के अंदर उम्मीद की किरणें भर लोगे,
लगे रहो तुम कर लोगे।
तुम्हारी ताकत दृढ़ इच्छा में है, मंज़िल स्वयं तुम्हारी प्रतीक्षा में है,
हकीकत बना दे स्वप्न तुम्हारा वो सामर्थ्य तुम्हारी शिक्षा में है।
तुम्हारा धैर्य तपस्या है, ये कोई सौगात नहीं,
जो निरंतरता तुम रखते हो ये सबके बस की बात नहीं,
इस तप से तुम्हें वो तेज मिलेगा, तुम सारे तन को हर लोगे,
लगे रहो तुम कर लोगे।
— Dinesh Prajapati