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एक दिन तुम खुद कहोगी

मैं इंतजार करूँगा, लेकिन आपकी वापसी के लिए नहीं, बल्कि उस दिन का इंतजार करूँगा जब तुम खुद रुक कर कहोगी, "किसी ने भी मुझे इतना नहीं चाहा, जितना तुमने चाहा था, किसी ने भी इतना साथ नहीं दिया जितना तुमने दिया। मुझे तुम्हारे जैसे कोई नहीं समझता है, किसी ने भी मेरी उतनी परवाह नहीं की जितनी तुमने की है।"

मैं तुम्हें बेतहाशा नहीं खोना चाहता, शायद आपको वो दिन याद होंगे जहाँ मैं था। वह जिसने हजारों उपेक्षा, अपमान और पीड़ा सहन की लेकिन कभी भी तुम्हारा हाथ छोड़ना नहीं चाहा। पर अफ़सोस वो हाथ तुमने जबरदस्ती छुड़वा दिया। जितना मैं तुम्हारा हुआ उसका आधा भी अगर मैं किसी और का होता तो वो नाज करती अपनी किस्मत पर।

— Prajapati

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