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मैं हार नहीं सकती

मैं हार नहीं सकती

मैने देखी है हजारों अड़चने ,

कभी सो गई मां भूखी ,

कभी कुछ निवालो में शांत सी रही ।

काट काट कर पेट,

वो खर्चा सभालती रही ।

धसती रही आत्मा पापा की ,

हड़डिया भी चिपकती रही ।

हाथ पैर सुखड़ कर सब एक हो गए ,

छत घर की टपकती रही ।

  1. कर कुछ इनको दिखाना है ,

पापा को राजा और मां को महारानी बनाना है ।

स्थापित करना है स्वराज्य इनका ,

विरासत में खुशियों का उपहार देना है ।

यूं जो हार जाऊं तो ,

क्या मैं बेटी इनकी कहलाऊगी।

मैंने देखा है इन्हे रात में भी काम करते हुए,

फिर मैं कैसे थक जाऊंगी,

निकली हू अभी तो घर से ,

देखना मंजिल पर भी पहुंच जाऊंगी ।

  • और कैसे हार जाऊं मैं ,

जवाब मैं जीत की गूज लाऊंगी।

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