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मेरा भारत

मेरा भारत कितना सुंदर है,

सूरज की पहली किरण सा उज्ज्वल है।

हिमालय जिसकी शान बना,

गंगा जिसकी पहचान बना।

खेतों में लहराती हरियाली,

नदियों की मधुर सी रवानी,

हर ऋतु यहाँ गीत सुनाती,

धरती माँ मुस्कुराती जाती।

मंदिर की घंटियों की धुन,

मस्जिद की अज़ान की सुकून,

गुरुद्वारों की सेवा पवित्र,

चर्चों की प्रार्थना का चित्र।

कितनी भाषाएँ, कितने रंग,

फिर भी दिलों में एक ही ढंग—

हम सब मिलकर कहते हैं,

भारत से बढ़कर कुछ भी नहीं।

यहाँ की मिट्टी में खुशबू है,

यहाँ के लोगों में जादू है,

मेहनत, साहस, प्रेम की कहानी,

यही है मेरे भारत की निशानी।

जब भी दुनिया पूछे मुझसे,

सबसे सुंदर जगह कहाँ है,

मैं गर्व से सिर उठाकर कहूँ—

मेरा भारत ही मेरी शान है।

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