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एक इंसान जिसने मुझे सबसे ज़्यादा सिखाया

एक इंसान जिसने मुझे सबसे ज़्यादा सिखाया

ज़िंदगी में हमें कई लोग मिलते हैं। कुछ लोग सिर्फ़ यादें देकर चले जाते हैं, और कुछ ऐसे होते हैं जो हमें जीने का तरीका सिखा जाते हैं। मेरी ज़िंदगी में भी एक ऐसा इंसान था जिसने मुझे सबसे ज़्यादा सिखाया।

वह कोई बड़ा अधिकारी, अमीर आदमी या मशहूर व्यक्ति नहीं था। वह मेरे पिता थे।

बचपन में मैं अक्सर उन्हें सुबह जल्दी उठते और देर रात तक मेहनत करते देखता था। कई बार मैंने उनसे पूछा, "आप इतना काम क्यों करते हैं?" वे मुस्कुराकर कहते, "ताकि तुम्हारे सपने पूरे हो सकें।"

उस समय उनकी बातों का मतलब समझ नहीं आता था। मुझे लगता था कि मेहनत तो हर कोई करता है। लेकिन जैसे-जैसे मैं बड़ा हुआ, मैंने महसूस किया कि मेहनत सिर्फ़ शरीर से नहीं, बल्कि दिल और इरादों से भी की जाती है।

एक बार हमारे परिवार पर बहुत मुश्किल समय आया। आर्थिक स्थिति खराब हो गई। घर में चिंता का माहौल था, लेकिन मैंने कभी अपने पिता को टूटते हुए नहीं देखा। वे हर दिन उसी आत्मविश्वास के साथ घर से निकलते और कहते, "मुश्किलें हमेशा नहीं रहतीं, लेकिन हिम्मत रखने वाले हमेशा आगे बढ़ते हैं।"

उनकी यही बात मेरे दिल में बस गई।

उन्होंने मुझे सिखाया कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की शुरुआत होती है। उन्होंने सिखाया कि ईमानदारी का रास्ता भले ही कठिन हो, लेकिन मंज़िल सबसे सुंदर होती है। उन्होंने सिखाया कि दूसरों की मदद करना इंसान की सबसे बड़ी पहचान है।

आज जब भी जीवन में कोई कठिनाई आती है, मैं उनके शब्दों को याद करता हूँ। मुझे एहसास होता है कि किताबों ने मुझे ज्ञान दिया, लेकिन जीवन जीना मैंने उनसे सीखा।

शायद दुनिया के लिए वे एक साधारण इंसान थे, लेकिन मेरे लिए वे सबसे बड़े शिक्षक थे। अगर आज मैं कुछ भी अच्छा कर पा रहा हूँ, तो उसमें उनकी सीख और संस्कारों का सबसे बड़ा योगदान है।

सच कहूँ तो, मेरी ज़िंदगी का सबसे अनमोल गुरु वही इंसान है जिसने मुझे चलना सिखाया, गिरकर उठना सिखाया और कभी हार न मानना सिखाया।

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