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चले आओ
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चले आओ
रमेश तिवारी लल्लन गुलालपुरी
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· 3 May
चले आओ ,
दिखाना है ,
तुम्हारे बिन भी जी लेंगे ।
मगर तुमसे,
जुदा होकर,
मरेंगे भी तो घुट-घुट कर ।।
चले आओ....
मिले ना तुम ,
सहज जग में ,
तुम्हें खोजा यूँ दर-दर मैं ।
तेरे आंखों ,
का जादू है ,
दीवाना मैं हुआ मिलकर ।।
चले आओ......
कभी मैंने ,
नहीं सोचा ,
तेरे उर में यूँ बसने की ।
मगर तुमने ,
हमें लूटा ,
मेरे नाजुक हृदय बस कर ।।
चले आओ......
बिजली-सी ,
तड़प जाता,
मेरा तन-मन मचल जाता ।
सम्हाँलू मैं,
नयन कैसे ,
बरसते जब घटा बनकर ।।
चले आओ......
चपल यादें ,
ये सौतन-सी ,
सताएंगी मगर हम तो ।
सजाएंगे ,
गुलिस्ता - सा ,
तेरे ही नाम अधरों पर ।।
चले आओ......
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