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तेरे बिना ये मेरी ज़िन्दगी,                            एक सज़ा सी न रह जाए.......

अपनी कलम से,

      तेरे बिना ये मेरी ज़िन्दगी,

                           एक सज़ा सी न रह जाए.......

तू डांट दे, सज़ा दे, या फ़िर नज़रें जो चुराए मुझसे,

          बिन देखे झील सी आँखों को,दिल से रहा न जाए!

तेरे हर बात में बसते जज़्बात,तू भी समझ न पाए,

          तेरे बिना तो सन्नाटा भी, अब चुपचाप मुझे रुलाए!

ग़र जो तुम करीब मेरे तो, हर दर्द भी भुला दूंगा मैं,

          तेरी इक स्पर्श की सोच से, हर मौसम महक जाए!

लगे तेरी मुस्कान की लौ में,मेरा हर सबेरा है आता,

          तेरे बिन तो रोशनी में भी,हर ओर अंधेरा छा जाए!

हर शाम लेते तेरा नाम,दिल खुद-ब-खुद खुश होता,

         तेरे ख्वाबों से ही हर रात,मुझे अब खुद को सुलाए!

ग़र कभी तू जो रूठ जाए,हर खुशी मुझसे कतराए,

         तेरी आवाज़ के बिना तो, ये दुनियां वीरान हो जाए!

जो दूर हो मुझसे, फिर भी ये दिल तुझे पास बुलाए,

         तेरी यादों की चादर में, ये तन-मन मेरा लिपट जाए!

तेरी मोहब्बत ने ही मुझे,है एक नई पहचान दिलाई,

         तेरे बिना तो हर आइना भी, खुद से ही नजरें चुराए!

हर मोड़ पर बस तुम ही तुम, हो इस रूह की प्यास,

         तेरे बिना ये मेरी ज़िन्दगी,एक सज़ा सी न रह जाए!

तेरे बिना ये मेरी ज़िन्दगी, एक सज़ा सी न रह जाए......

एक सज़ा सी न रह जाए......

एक सज़ा सी न रह जाए......

༺꧁🖋️ डॉ. सूर्य प्रताप राव रेपल्ली 🙏꧂༻

मौलिक व स्वरचित @ सर्वाधिकार सुरक्षित

#motivational quotes

#Author : Poet, Lyrics Writer & Story Writer

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