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ऐरी की मंडी

अब Erry की मंडी में

सीमेंट, सरिया और हास्य का मसाला खुलकर पड़ेगा।

Erry की मंडी

कहानी – 8 : ठेकेदार की दुकान

Erry की मंडी में

यह दुकान दूर से ही पहचानी जाती थी।

क्योंकि यहाँ

काम कम दिखता था,

बोर्ड ज़्यादा।

दुकान के बाहर चमचमाता पोस्टर—

“यहाँ विकास मिलता है

(नमूना देखकर)”

अंदर रखा था—

आधी बोरी सीमेंट

टेढ़ा-मेढ़ा सरिया

एक नक़्शा,

जिसमें सड़क सीधी थी

पर असल में कभी बनी नहीं

और एक बड़ा सा रजिस्टर—

“भुगतान लंबित, पर उम्मीद चालू”

दुकानदार था—

एक ठेकेदार।

सफेद कुर्ता,

गले में सुनहरी चेन,

और चेहरे पर

“सब मैनेज हो जाएगा” वाली मुस्कान।

किसी ने पूछा—

“ठेकेदार जी, क्या बना रहे हो?”

ठेकेदार ने तुरंत कहा—

“भविष्य।”

फिर धीरे से जोड़ा—

“काग़ज़ों में।”

उसने नक़्शा दिखाया—

“देखिए,

इस सड़क पर इतने गड्ढे नहीं हैं।”

किसी ने टोका— “पर सड़क पर तो हैं!”

ठेकेदार ने कंधे उचका दिए—

“वो ज़मीन की प्राकृतिक सजावट है।”

एक इंजीनियर बोला—

“सर, सरिया कम है।”

ठेकेदार ने मुस्कराकर कहा—

“आँखों का वहम है,

विकास में विश्वास रखिए।”

उसने सीमेंट की बोरी थपथपाई—

“ये सीमेंट बहुत मजबूत है,

बारिश में अपने-आप घुल जाती है।”

पूरी मंडी ठहाकों से गूँज उठी।

एक नागरिक बोला—

“पुल कब तक तैयार होगा?”

ठेकेदार ने रजिस्टर खोला—

“चुनाव से पहले…

या बाद में…

स्थिति पर निर्भर करता है।”

ठेकेदार ने दुकान के नीचे लिख दिया—

“काम अगर टिकाऊ हो,

तो टेंडर दोबारा कैसे मिलेगा?”

Erry की मंडी में

आठवीं दुकान भी खुल चुकी थी।

यह दुकान

ईंट नहीं जोड़ती,

पर

कहानी ज़रूर मज़बूत बनाती है।

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