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कृष्ण अनंत अप्रतिम हैं

श्री कृष्ण का जन्म पृथ्वी पर सर्वप्रथम वात्सल्य रस का अप्रतिम और मनोहरी प्रस्फुटन है, जो और कहीं देखने को नही मिलता। क्यूंकि एकमात्र कृष्ण ही ऐसे हैं जो संसार के किसी भी व्यथित मन को अपनी एक मुस्कान से ही आकर्षित करने कि कला जानते हैं। वे जितने मनमोहक हैं उतने ही नटखट भी, वे ज्ञानियों में महाज्ञानी हैं और युद्धभूमि में अजेय योद्धा भी। तथा वे सर्वश्रेष्ठ वक्ता भी हैं और न्यायाधीश भी। वे महारथी भी हैं और अद्भुत सारथी भी। और इस प्रकार श्री कृष्ण का सम्पूर्ण व्यक्तित्व अप्रतिम और असाधारण आभा को चारों दिशाओं में वितीर्ण करता हुआ भुवन भास्कर है। जो सदैव मानवता का पथ प्रदर्शन करता रहेगा। और निष्कर्षतः मेरी दृष्टि में श्री कृष्ण का जीवनदर्शन किसी एक धर्म की सीमाओं से बांधकर नहीं देखा जाना चाहिये।क्यूंकि वे सम्पूर्ण प्राणी जगत के प्रेरणा स्त्रोत हैं। और अनंतकाल तक उनकी बांसुरी का स्वर जनमानस को स्पंदित करता रहेगा।

✒️लेखक : शिव शिल्पी

कृष्ण अनंत अप्रतिम हैं

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