बस एक दीप जला देना
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जब याद कभी हम आए, तुम बस एक दीप जला देना
शहीदों की तस्वीरों पर, श्रद्धा के कुछ फूल चढ़ा देना।
जब फहराओं तिरंगा तुम और तुम पर फूल बरस जायें,
गंगा जल सा बस एक आंसू, तुम पलकों से बहा देना।
रंग हवा में उड़ने लगे, दीप दहलीज़ों पर जलने लगे,
हम एक दिन लौट के आयेंगे, उम्मीद यह बनाए रखना।
छूकर हिमालय जब-जब द्वार पर देंगी दस्तक हवायें,
ये हवाएं हैं पैगाम हमारा तुम अपनों तक पहुंचा देना।
शिखरों पर कभी हम भटके, रेत के थप्पड़ कभी हमने सहे
हमने सीखा है सरहद पर, कभी आंच न आने देना।
गोलियों की बारिश हो या, आती बारूद की आंधी हो
हम पुष्प, सुगंध समीर बना देंगे तुम सबको बता देना।
आती खबरें सीमा पर, तुमने बसों-ट्रेनों को जलाया
सड़कों पर तोड़-फोड़, धरना, प्रदर्शन, रोज जाम लगाया
तब विचलित होते हैं हम, देख तुम्हारा यह ताना-बाना
क्या इसलिए खाते हैं हम गोली सीने पर, तुम इसका जवाब देना।
अपराध, भ्रष्टाचार, गुंडागर्दी की दिखती जो तस्वीर है
गांधी, नेहरू के इस देश की तुम यह तस्वीर बदल देना।
फिर बिखराना अंबर धरा पर तुम अपने वतन की खुशबू
मर भी गए हम तो क्या, तुम देश का मान ना गिरने देना।
जब याद कभी हम आयें, तुम बस एक दीप जला देना
शहीदों की तस्वीरों पर, श्रद्धा के कुछ फूल चढ़ा देना।
शिवदत्त डोंगरे भूतपूर्व सैनिक खंडवा
यह रचना मौलिक है।
शिवदत्त डोंगरे