बीता बचपन गई जवानी,बुढ़ापा जाने को तैयार.
तीन दिवस का शोक मनेगा,और फोटो पर हार.
हाँ मैं रंग मंच कलाकार.
चाटुकार यश गाथा गाते,जिनके दमन दाग हजार.
समय का पहिया चलता जाए,अपने देते हैँ दुत्कार
हाँ मैं रंग मंच कलाकार.
चlल चलन अब कौन देखता, माया के दीवाने लाख हजार.
लगा मुखौटा घूम रहे,यार दोस्त परिवार
हाँ मैं रंग मंच कलाकार.
अन्धो के आगे वीन बजाना, हैँ बिलकुल बेकार.
फटा दूध सिल ना सकेगा, लाख करो उपचार
हाँ मैं रंग मंच कलाकार..
सोते को सभी जगाते, पर जगते को कौन जगाता यार.
होठो पर चुप्पी रख # संजय # और जुँवा पर ताला मार..
हाँ मैं रंग मंच कलाकार....