वो बेटा माँ का लाडला,
पिता का शहजादा था,
बाज़ी के लिए शाजिल,
छुटकी के लिए उसका भाई
उसका सबसे बड़ा रक्षक था,
अनुज के लिए वो राम का धनुष था,
अपनी प्रियसी के लिए वो प्रियवर प्राणनाथ था!
पर इतना ही काफ़ी न था,
इसपर भी वो एक सैनिक था,
और सबसे प्यारा उसको अपना यही किरदार था,
ज़ब भी ढलता इस किरदार मे,
वर्दी कि शान मे,
दिखता उसके सीने मे छपा तिरंगा था!
ज़ब गया वो अपनों को छोड़
अपने वतन के वास्ते युद्ध भूमि पर,
माँ का सिर पर किया तिलक था साथ,
पिता, बाज़ी का आशीर्वाद लेकर
छुटकी, अनुज को बहुत बहुत प्यार देकर,
ज़ब वो गया युद्ध भूमि पर,
सिंह सी दहाड़ लेकर,
दुश्मन भी काँपे थे सारे,
बस आने से उसके,
युद्ध घनघोर चला,
बारूदो कि बू से सेकड़ो का बदन जला,
हुई थी भूमि लहूलुहान,
हर तरफ था मचा घमासान,
त्राहि त्राहि मची,
उसपर सैनिक ने अपने घर एक चिट्ठी लिखी थी!
लिखता हूँ,
सबसे पहले माँ करता हूँ तुझको प्रणाम,
जन्मभूमि के खातिर जो छोड़ चला जननी का दुलार,
हा, माँ मैं वही पूत हूँ जो छोड़ चला जननी का दुलार!
अब पिता को लिखता है,
युद्ध भूमि पर आते वक्त आपने दिया मुझको एक वरदान था,
अजर-अमर भव,
बनो योद्धा महान,
मुझको करना माफ,
तेरा ऋण मैं चूका न सका,
देखा था तेरे कंधे पर बैठ इस जहाँ को,
तेरे ही कंधे पर बैठ उस जहाँ को भी देखूंगा!
अब अपने भाई को कहता है,
अनुज सुनो,तुम अब मेरी बात,
धरती कि ये धरोहर अब मैं तुझको सौप जाता हूँ,
तुझसे बस एक वादा चाहता हूँ,
तू वादा करना इस धरती से,
मेरी वर्दी से,
धरती का ऋण जो मैं चूका न सका,
तू चुकाएगा,
इस जन्मभूमि के खातिर तू भी एक दिन तिरंगे मे लिपट आएगा,
हा वादा कर!
बहना, सूना मैंने तेरा रक्षाबंधन किया,
मैं न बन सका तेरा शाजिल,
न मैं बन सका तेरा रक्षक,
मैं तो धरती माँ का सेवक था
उसपर ही मर मिट गया!
अपनी प्रियसी को कहता है,
सात जन्मों का वादा किया,
एक जन्म न निभा सका,
तू मेरी जान थी,
मगर क्या करू
तिरंगा मेरी आन -बान - शान थी,
मुझको तू करना माफ़,
तेरे कँगना बिंदिया चूड़ियाँ,
तेरे सोलह श्रृंगार का ऋण है मुझपर,
सब छोड़ अब मैं जा रहा हूँ,
पर वादा करता हूँ
मैं वापस आऊंगा!!
Gauri sarda