शीर्षक - " नारी "
छूं ले ऊंचाईयों को अपने पंख पसार,
ना डर,ना सहम,ना झिझक किसी से।
कर विश्वास अपने पंख पर,
मंजिल मिलेंगी अनेकों बार।
मुश्किलें आएंगी डगर में कदम-कदम पर,
लेकिन ना होना तू हताश,क्योंकि,
तू है शक्ति,तू है भक्ति,तू ही मुक्ति अपार।
तुझमें बसा सर्वस्व ब्रह्मांड,
एक बार अपनी शक्ति पुकार।
तु दुनिया से नहीं, दुनिया तुझसे है,
ये बता दें सबको खुलकर एक बार।
तु ही जन्म देती हैं,तु ही विकसित करती हैं।
तु ही हैं पालनहार-तु ही हैं पालनहार।
आज कर वादा अपने-आप से,
ना डरेगी,ना आने वाली पीढ़ी को डरने देंगी,
निडरता की सीख सीखलाएगी।
नारी वहीं जिसमें हों धैर्य अपार।