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अधूरी प्रार्थना

अधूरी प्रार्थना

✍️ डॉ. सुरक सेल्वी चिन्नप्पन

कुछ शब्द हैं — जो हृदय में छिपे हुए हैं,

कुछ आँसू हैं — जो अब तक गिर नहीं पाए हैं।

आज सोचा — इन्हें शब्दों में कह दूँ,

शायद तब तुम मेरे मौन को सुन पाओगे।

जिस क्षण तुमसे मिली, समय थम-सा गया,

दिल ने कहा — “यही है... अब कुछ और नहीं।”

वो मिलन के पल, वो वादे, वो क्षण —

क्या वो सब बस एक अधूरी कहानी थी?

बीमारी के दिनों में मैं घर से दूर चली गई,

पर तुम्हारा साथ कभी नहीं छोड़ा।

तुमने कहा था — “अगर पुकारोगी तो मैं आऊँगा,”

मैंने पुकारा... पर जवाब मिला — बस मौन।

धीरे-धीरे शब्द कम होते गए,

फोन की दूसरी ओर अब सिर्फ़ चुप्पी थी।

फिर एक दिन वो पत्र आया —

जिसमें हमारा प्रेम एक शब्द में सिमट गया — “तलाक।”

तुमने कहा था — “हम एक आत्मा हैं,”

तो फिर एक आत्मा दूसरी को कैसे तोड़ देती है?

क्या तुम्हें सचमुच कोई एहसास नहीं हुआ?

या इस रिश्ते में सच्चाई सिर्फ़ मेरी तरफ़ थी?

एक ओर था भाई के विवाह का उत्सव,

दूसरी ओर मामा की अंतिम साँस।

दिल टूट चुका था, फिर भी मुस्कुराई,

क्योंकि मामा की अंतिम इच्छा थी — “विवाह खुशी से हो।”

पर उसी समय... डाकिया दरवाज़े पर आया,

उसके हाथ में था — तुम्हारा तलाक़ नोटिस।

समझ नहीं पाई...

किसके लिए रोऊँ... और किसके लिए मुस्कुराऊँ? 💔

सब कुछ परिवार से छिपा लिया,

क्योंकि हालात ऐसे थे — आवाज़ उठाना भी पाप था।

जहाँ उम्मीदों की डोर बँधी थी,

वहीं तुमने सब तोड़ डाला...

और मैं बस खड़ी रही... टूटती रही।

उम्मीद का दीप जलने से पहले बुझ गया,

एक जीवन पूरा होने से पहले बिखर गया।

क्या ये मेरी किस्मत थी,

या तुम्हारे दिल का बदलता मौसम?

आज भी मेरी प्रार्थनाओं में तुम्हारा नाम है,

पर वो आँसुओं में डूब जाता है।

मुझे अब गुस्सा नहीं... बस थकान है,

एक अधूरी प्रार्थना की तरह, जो कभी पूरी नहीं हुई।

अगर ये मेरे शब्द कभी तुम तक पहुँचें,

तो जान लेना —

आज भी मैंने तुम्हें अपने हृदय से मुक्त नहीं किया है... 🌹

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