
नैनों में जो अंबर झाॅंकता है, मुझे उस तक चढ़कर जाना है।
अधरों ने कहा गाते रहना, अंबर को जो गीत सुनाना है।।
अंतस के उजले कक्ष में मेरे, स्वप्न तो सज- धज रहते हैं,
मन की देहरी पर आशा के, वह झरने झर-झर बहते हैं।
हृदय ने कहा मत घबराना, उड़ने का जो तूने ठाना है।
नैनों में जो अंबर झाॅंकता है.....
तारों संग चंदा चलता है, सूरज का रथ भी निकलता है,
पुरवाई चले धरती घूमे, क्षण-क्षण यह
काल बदलता है।
पाॅंवों ने कहा चलते रहना, गंतव्य पर तुझे पहुॅंचाना है।
नैनों में जो अंबर झाॅंकता है.....
सुख-दु:ख जीवन के टोने है, दुर्भाग्य सौभाग्य तो ढोने हैं,
यह रंगमंच है जगती का, हम प्रभु के हाथ खिलौने हैं।
हाथों ने कहा श्रम करती रहो, कर्तव्य के पथ डट जाना है।
नैनों में जो अंबर झाॅंकता है.....
पुष्पों ने सिखाया गल जाना,दीपक ने कहा जलते रहना,
नदिया ने सिखाया ना थमना, वृक्षों ने कहा फलते रहना।
हिम्मत ने कहा बढ़ते रहना, अंबर ही तेरा ठिकाना है।
नैनों में जो अंबर झाॅंकता है.....
पर सेवा पर उपकार करूॅं, जीवन में स्वाभिमान रहे,
जग चंदन चर्चित नाम हो,और
कीचड़ में कमल सा मान रहे।
बुद्धि ने कहा सत पथ पर चलो, जीवन का ये ताना-बाना है।
नैनों में जो अंबर झाॅंकता है, मुझे उस तक चढ़कर जाना है।
अधरो ने कहा गाते रहना, अंबर को जो गीत सुनाना है।।