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हृदय के पुष्प

#दिनांक -06-04-26
#ह्रदय के पुष्प
#सोमवार

पत्ते झड़ गए उम्र के..
पर प्रेम जड़ हैं पीपल की
चमकेंगे हम गुजरे वक़्त की यादों में,
बन.. हम तुम दोनों सोने चांदी से...।
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जिंदगी जन्म से बुढा़पे तक
ढलती शाम में बदल जाती हैं,
एक रात फिर हम पर खत्म हो जाती है!

बचपन मे काम की चिंता ना कुछ करने का,
बस खेलना कुदना और आराम करने का!

सजाते है आंखो में हजारो सपने अपने,
ख्यालो में उन्हें सोच कर मुस्कराते है!

जवानी मे काम की टेंशन घर कर जाती है,
जिंदगी मे उतार चढा़व आ जाते है,
सभी अनुभव जिदंगी मे नया सबक दे जाते है!

सुबह के बाद जब सीधी रात होती है,
जिंदगी बहुत थकी होती है,
अपनो के बीच तलाश होती है अपनो की,
जिदंगी बहुत तन्हा सी होती है।

एक साथी ही अपने साथ होता है,
जो जीवन की डोर से बंधा होता है,
उसी में खुशी को
तलाशते है हम
बाते दिलो की उसे बताते है हम,
जब रात होती है,
बिना कुछ कहे जिंदगी निकल जाती हैं,

सोचते रहते है अपनो के बारे मे
और जिदंगी सिमट जाती है,
गुजर जाती है ताउम्र युंही जिदंगी,
बस अपनो को तलाशती रहती रहती है!

विपिन उपाध्याय
भवानीमंडी
राजस्थान

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