
शिकायत नहीं है तुमसे,
काश फिर भी बता दिया होता…
क्यूँ भला करें शिकायत हम,
हम शिकायत करने वाले होते कौन हैं…
काश हमें पहले ही समझा दिया होता…
हर खामोशी का जवाब मिलना
ज़रूरी तो नहीं होता,
पर इस मायूसी का मतलब
काश हमें भी बता दिया होता…
थोड़ा-सा हक तो था हमको
तुमको जानने का,
ज़्यादा न सही,
काश थोड़ा-सा ही …
मुझे मेरी हालत का पता दिया होता…
शिकायत नहीं है तुमसे,
काश फिर भी बता दिया होता…
क्या हुई गलती,
ये जानना भी अब ज़रूरी नहीं…
लिहाज़ तुम्हारा अब
पहचानना भी ज़रूरी नहीं…
चले गए तुम — अच्छा है, खुश रहो,
पर जाने से पहले
एक बार बता तो दिया होता…
शख्सियत हमारी अनजान थी तुमसे,
पर दिल की एक पहचान थी तुमसे…
हक़ तो नहीं था हमें कुछ भी जानने का,
पर अगर लायक समझा होता…
तो सब खुद ही बता दिया होता…
शिकायत नहीं है तुमसे,
काश फिर भी बता दिया होता…
अब कहने को कुछ खास नहीं है,
पर तुमसे जुड़ा एहसास वही है…
दूर होकर भी साथ रहती हो,
काश तुम्हें भी
मेरे होने का एहसास हुआ होता…
🔥 Ending
शिकायत नहीं है तुमसे…
पर काश…
तुमने एक बार
बता दिया होता… 💔
✍️- संदीप यादव