आंखों में दिल में भरा है दर्द हमारे
मालूम नहीं क्या करे गा अगर वह फूट गया
ज़माने की बातें मत करो हमसे
वह तो हमसे पहले ही रूठ गया।
सवाल कई हैं आगे मेरे
उनका जवाब बनना और सीखना चाहता हूं
घर पर खाली मैं भी नहीं बैठना चाहता
कलम मेरे हाथ में है बस अपनी कहानी
खुद अपने हाथों से लिखना चाहता हूं।
आंधियां चाहे कितनी भी तेज चलें
मैं अपने कदमों को डगमगाने नहीं दूंगा
थक जाऊं अगर रास्तों में कभी
फिर भी सपनों को सो जाने नहीं दूंगा।
जो टूट गया उसे जोड़ने की ज़िद है मेरी
मैं अपनी पहचान खुद बनाने आया हूं
हसते रहना है गम के साए में भी
क्योंकि रोकर सबको क्या बताने आया हूं।
जो कल मुझे कम आंकते थे
उनकी नज़रों में अपना मुकाम छोड़ जाऊंगा
आज कलम से लिख रहा हूं कहानी
कल इतिहास में अपना नाम छोड़ जाऊंगा।
लिखित प्रदीप poohla
6284227079