
'दो बैलों की कथा '
आज तकरीबन २५ सालों बाद मुझे यह कहानी पढ़ने का मौका मिला ।
मैं कक्षा ९ की एक छात्रा को ट्यूशन देती हूं इनको इस साल से गंगा पाठयपुस्तक पढ़नी है।जिसका प्रथम पाठ ही है दो बैलों की कथा ।इस कहानी को मैने बचपन में पढ़ा था ।
मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित यह कहानी इतनी प्रासंगिक है जो आज के समय में भी बिल्कुल ठीक साबित होती है ।यह कहानी स्वतंत्रता के संघर्ष को बहुत ही सुंदर तरीके से पशुओं की भावनाओं के माध्यम से व्यक्त की गई है।यह कहानी हमारे अंदर हिम्मत ,जोश पैदा करती है। यह हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ना सिखाती है।
इसलिए मेरा सुझाव है कि सभी यह कहानी जरूर पढ़ें ।