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वो किताब जिसने मेरी सोच बदल दी

यही था आज का विषय ,सोचा इस विषय पर मैं भी अपने विचार व्यक्त करूं। वैसे तो कई किताबें मैं पड़ी है लेकिन ऐसी किताब जिसने मेरी सोच बदल दी वो किताब है - ' ज़िंदगी की किताब ' .... ये किसी किताब का नाम नहीं बल्कि मेरी , आपकी और हम सब की अपनी किताब है ,जिसे हम लिखते नहीं है फिर भी ये हमारी किताब होती है । ये किताब में हमारे अनगिनत अनुभवों का खजाना छिपा होता है । इस किताब के अगले पन्ने को हम आज नहीं पढ़ सकते क्योंकि कल क्या होगा वो हमें पता नहीं होता , कौनसी चुनौतियां हुआमा इंतजार कर रही होगी इसकी हम कोई जानकारी नहीं होती । बस हम तो अनुभव करते जाते है और सीखते जाते हैं और वही सीख इस जिंदगी की किताब के पृष्ठ बन जाते है ।ये किताब हमे किसी भी चीज को देखने का नजरिया सिखाती है , यही सोचने पर मजबूर करती है कि जो होता है उसमें तुम्हारा भला छुपा होता है इसलिए जिंदगी को अपना काम करने दो और तुम बस उसका साथ दो।

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