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गैरों से क्या करें शिकवा,                                 जो मेरे थे वो बदल गए.....

अपनी कलम से,

         गैरों से क्या करें शिकवा,

                                जो मेरे थे वो बदल गए.....

कभी वादे बदल गए,फ़िर कभी इरादे बदल गए,

            हम न बदले क्या हुआ, थे उसके वादे बदल गए!

जिसकी मुस्कान में मेरी,सारी दुनियां थी बसती,

            वक्त की ठोकर क्या लगी,वो चेहरे ही बदल गए!

मेरे ख़्वाबों में जिनकी, तस्वीर सजती थी रहती,

            सुबह हुई तो ख्वाबों के,वो सारे नज़ारे बदल गए!

था मैनें चाहा उम्र भर,साथ निभाने का ये रिश्ता,

            पर उनके साथ चलने के, यारों बहाने बदल गए!

जिन हाथों को थामे,  सुकून पाया था कभी मैनें,

            आज उन्हीं हाथों के, हैं सारे इशारे ही बदल गए!

ये मेरे जज़्बातों की कीमत,उन्हें समझ नहीं आई,

            और उनकी बेरुख़ी के अब, अफसाने बदल गए!

थे कल तक कहते,तुम बिन जीना मुमकिन नहीं,

            आज वही जीने के, उनके तरीके अब बदल गए!

मेरी तन्हाइयों ने जब, रातों में आवाज़ दी उनको,

            हर आवाज उनकी, नींद के सारे पहरे बदल गए!

दिल आज भी उसी मोड़ पे,करे इंतज़ार जिसका,

            अब लौटने के उनके, अपने सारे रास्ते बदल गए! मोहब्बत का असर यारों, पत्थर दिल पिघल गए,

           गैरों से क्या करें शिकवा, जो मेरे थे वो बदल गए!

जो मेरे थे वो बदल गए......

जो मेरे थे वो बदल गए......

༺꧁🖋️ डॉ. सूर्य प्रताप राव रेपल्ली 🙏꧂༻

मौलिक व स्वरचित @ सर्वाधिकार सुरक्षित

#motivational quotes

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