
जो सबके दिलों पर राज करे
जिस पर भारत भी नाज़ करे,
मैं पंख लगाकर वाणी के आकाशवाणी में आई रे,
मैं पंख लगा के बधाई के आकाशवाणी में आई रे।।
मार्कोनी का है यह वरदान जो, रेडियो हाथों में पाया,
भारत में संचार का जादू,90 बरस से छाया,
जो संवाद-भाषा से इलाज करे,
करुणा से ख़ुद को नवाज़ (दयालु) करे,
मैं पंख लगा कर श्रद्धा के आकाशवाणी में आई रे,
मैं जिव्हा पर वंदन के अनुपम मोती भर के लाई रे।
रेगिस्तान में झील के जैसी, यह फुलवारी प्यारी,
गाॅंव किनारे मंदिर जैसी, इसकी देहरी न्यारी,
तरंग से नित आवाज़ झरे,
जहाॅं कुछ नहीं स्वर और साज़ परे।
मैं पंख लगा कर चेतना के आकाशवाणी में आई रे,
जन-जन के मन में भरने को मैं नव उजियारा लाई रे।।
राष्ट्र एकता और अखंडता का यह मठ है प्यारा,
मूल्य, संस्कृति और संस्कारों का है यह पनघट न्यारा,
जो लोकतंत्र सिर ताज धरे,
नये सपनों में परवाज़ भरे
मैं पंख लगा कर सरगम के आकाशवाणी में आई रे,
मैं मन की मधुर तरंगों को अन्तस में भर के लाई रे।
नर नारी आबाल वृद्ध और वंचित के हित साधे,
मनोरंजन संग शिक्षा-ज्ञान और सूचना स्वर में बाॅंधे,
कल्याण प्रगति के कार्य करे,
जो शांति सत्य से समाज भरे,
मैं पंख लगा कर रागिनी के आकाशवाणी में आई रे,
भारत की माटी की सुरभि भी शब्दों में भर लाई रे।।
जन-जन और सट्टा नीति निर्धारक के मध्य है सेतु,
श्रेष्ठ विचारों की है प्रसारक, पुण्य की वर्षा हेतु,
अध्यात्म- भक्ति मेराज (सीढ़ी) करे,
जन-जन को जो हमराज़ करें,
मैं पंख लगा कर आशा के आकाशवाणी में आई रे,
मैं हृदय-हृदय को गीतों से आलोकित करने आई रे।।
हर भाषा-बोली को दुलारे, लोकरंग के पटल से,
माटी की सुरभि पहुॅंचाती अंबर तक की अज़ल से,
हर सैनिक को जाॅंबाज़ करे
कृषकों के लिए सूराज करे,
मैं पंख लगा कर प्रेरणा के आकाशवाणी में आई रे,
मैं लोकधुनों की पायल भी छन-छन बजती ले आई रे।।
जो सबके दिलों पर राज करे
जिस पर भारत भी नाज़ करे,
मैं पंख लगाकर वाणी के आकाशवाणी में आई रे,
मैं पंख लगा के बधाई के आकाशवाणी में आई रे।।
डॉ. शकुंतला सरूपरिया,
उदयपुर- (राजस्थान )
9351 412093