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दिल की गहरी आवाज़

🌹 दिल की गहरी आवाज़ 🌹

रात की ख़ामोशी में, दिल धीरे से रोता है,

अधूरे से सपनों का हर कोना सोता है।

हाथों से फिसलते रिश्तों की ये कहानी,

अंदर ही अंदर एक तूफ़ान संजोता है।

वो लम्हे, जब तू मेरे साथ था,

अब बस धुंधली सी यादों में कैद हैं।

क्या खोया, क्या पाया—सब अनकहा रह गया,

लब खामोश हैं, मगर आँसू बेहद सख़्त हैं।

विवाह का मतलब शायद समझ न पाए हम,

रास्ते मिले थे या बस यूँ ही टकराए थे हम।

अब अकेले चलने की हिम्मत भी नहीं,

पर साथ में भी कहाँ सच में साथ आए थे हम।

एक सुलह की कोशिश, एक आख़िरी सवाल,

क्या फिर से वही मोड़ मिल सकता है?

या ये दूरियाँ अब किस्मत बन जाएँगी,

जो हर ख़्वाब को चुपचाप सिल सकता है?

तुमसे बिछड़कर खुद को तलाश रही हूँ,

हर आईने में अपना अक्स नया लगता है।

क्या मेरी आवाज़ फिर तुम तक पहुँचेगी,

या ये रिश्ता अब बस दास्तां बनकर रह जाता है।

दिल में अब भी मोहब्बत कहीं ज़िंदा है,

पर दर्द ने उसे गहराई से ढक रखा है…

ये दिल की गहरी आवाज़ है,

शायद कभी तुम भी इसे सुन पाओगे… ✍️

🌿 मोरल (सीख):

हर रिश्ता सिर्फ़ प्यार से नहीं, समझ और संवाद से भी जीवित रहता है।

जब खामोशी बढ़ जाती है, तो दूरियाँ अपने आप गहरी हो जाती हैं।

बीता हुआ समय लौटकर नहीं आता,

लेकिन उससे मिली सीख हमें मज़बूत ज़रूर बनाती है।

कभी-कभी छोड़ देना ही सच्चा सुकून होता है—

क्योंकि खुद को खोकर किसी को पाना,

असल में खुद से हार जाना होता है। 🌹

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