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तुम भी मेरी मोहब्बत बन सकती थी ✍️

तुम भी मेरी मोहब्बत बन सकती थी,

मेरे लिए जन्नत बन सकती थी।

ढह गए वो सपने जिनपे

इमारत बन सकती थी,

तुम भी मेरी मोहब्बत बन सकती थी।

काश तुमने भी मेरे बारे में

सोचा होता,

फिर कहाँ हालात

आज के जैसा होता।

जो इश्क़ गवारा हुआ मुझे,

शायद वो मेरा होता,

मेरे नाकारा जीवन को

बदल सकती थी —

तुम भी मेरी मोहब्बत बन सकती थी।

हमने तो तुम्हारे खातिर

हर खुशी ठुकराई थी,

हमें क्या पता था

कि ये बस एक पल की सच्चाई थी।

तुमसे एक बेज़ुबान लड़के पर

कसी जिल्लत बच सकती थी,

तुम भी मेरी मोहब्बत बन सकती थी।

और ये सब तो छोड़ो,

बहुत कुछ सहना पड़ा,

बस आपको पाने के लिए

अपनों से दूर रहना पड़ा।

मांगी जो मैंने हर मंदिर में,

तुम वो मन्नत बन सकती थी,

तुम भी मेरी मोहब्बत बन सकती थी।

खैर छोड़ो… मैं ही था पागल,

जो इतनी शिद्दत से तुझे चाहा,

तुम्हें दिल मेरा सिर्फ एक

खिलौना नज़र आया।

चाहती अगर तुम तो

मेरी रूह में उतर सकती थी,

तुम भी मेरी मोहब्बत बन सकती थी।

                                            ✍️ संदीप यादव

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