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आकाशवाणी पर गीत

यह आकाशवाणी है भारत की धड़कन, यह सूरज है जिससे उजारा मिला,

यह जन-जन की आशा का, अभिलाषा का कुल,

जहाॅं स्वर ही स्वर का, पसारा मिला।

यह गौरव और विश्वास का अमृत सरोवर,

स्पंदन है राष्ट्र की आत्मा का घर-घर,

पावन ज्ञान-ज्योति का उज्जवल देवालय, यह चेतना गंगा बहाये है भर- भर।

यह 90 बरस की अमर कुंभ यात्रा, जहाॅं ऋषि की वाणी का द्वारा मिला।

यह आकाशवाणी है....

दिए पंख इसने भी स्वाधीनता को,

राष्ट्र का जय गान अमर कर दिया था, भरे पलकों में स्वप्न के शुभ्र मोती, हथेली पर साहस का शंख दान किया था।

यह भारत के अनुपम वैभव का झूला बिराजित जहाॅं हर सितारा मिला।।

यह आकाशवाणी है.....

दिखाए समाचारों की नित्य शक्ति,

भरे भारतीयों में असीम देश भक्ति, कृषक भाइयों की बने सारथी नित कलाओं को देती अतुल अभिव्यक्ति यह सुख दु:ख की साथी है आकाशवाणी,

यह माटी का सुरभित पिटारा मिला।

यह आकाशवाणी है.....

हां नित बोर होते ही भक्ति सुधा से,

भजन और मित्रों से कर देती मन तर,

ले मीरां के पद ओ, कबीरा की साखी परोसे यह नानक ओ तुलसी के शुभ स्वर

यह शिक्षा ओ आध्यात्म का मठ निराला,

जहाॅं सत्य सत का फुआरा मिला।।

यह आकाशवाणी है....

कर रागों की खेती-संगीत सरिता त्रिवेणी ओ मनचाहे गीत लुभाते,

जयमाला फ़ौजी की मनुहार का दर,

छायागीत, चित्र लोक भी भाते।

हवा महल है झलकियों का पिटारा,

मनुजता का जिससे इशारा मिला।

यह आकाशवाणी है....

अब प्रौद्योगिकी युग में धरोहर पुरानी, है नभ से उतरती नई स्वर कहानी,

हरेक बोली- भाषा पर बलिहारी जाए यह अंतस की वाणी है आकाशवाणी।

सखी भी सखा भी, ढाणी, गाॅंव,नगर में,

है सौभाग्य हर क्षण सहारा मिला।।

यह आकाशवाणी है भारत की धड़कन, यह सूरज है जिससे उजारा मिला, यह जन-जन की आशा का, अभिलाषा का कुल,

जहाॅं स्वर ही स्वर का पसारा मिला।

डॉ. शकुंतला सरूपरिया

उदयपुर(राजस्थान)

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