
जिंदगी एक दर्पण है,
जो दिखाती हर रंग अपना,
कभी मुस्कानों की धूप चमके,
कभी आँसुओं का साया गहरा।
यह दर्पण झूठ नहीं कहता,
बस सच को चुपचाप सजाता है,
हम जैसे खुद को गढ़ते हैं,
वैसा ही चेहरा दिखलाता है।
जब दिल में हो उजियारा,
तो हर तस्वीर निखर जाती है,
और मन में हो अगर अंधेरा,
तो दुनिया भी धुंधली लग जाती है।
यह सिखाती है हमें हर पल,
अपने आप से मिलना जरूरी है,
जो भीतर साफ और सच्चा हो,
उसी में जीवन की पूरी है।
न शिकवा कर, न गिला कर,
बस अपने कर्मों को संवार,
दर्पण खुद ही चमक उठेगा,
जब तू होगा सच्चा और उदार।
जिंदगी का यह आईना,
हर दिन कुछ नया बताता है,
जो समझ ले इसके इशारे,
वही असली राह पाता है।
इसलिए मुस्कुरा कर जीना सीख,
अपने मन को उजला कर ले,
दर्पण में खुद को देख,
और खुद से ही प्यार कर ले।