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शक्ति और करुणा (कविता)

शक्ति है पर्वत जैसी अटल,

करुणा है गंगा सी निर्मल जल।

एक में साहस की ज्वाला है,

दूजी में प्रेम का उज्ज्वल पल।

शक्ति हमें आगे बढ़ाती है,

संघर्षों से लड़ना सिखाती है।

करुणा मन को कोमल बनाकर,

दूसरों का दर्द मिटाती है।

जब शक्ति में करुणा बसती है,

तब मानवता मुस्कुराती है।

बल भी रहता, दया भी रहती,

तभी सच्ची जीत कहलाती है।

न हो शक्ति बिना संवेदना,

न हो करुणा बिना सहारा।

दोनों मिलकर जीवन बनते,

जैसे सूरज और उजियारा।

चलो हृदय में दीप जलाएँ,

शक्ति और करुणा अपनाएँ।

दुनिया को सुंदर बनाकर,

मानवता का गीत सुनाएँ।

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