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करुण पुकार

देवी भजन – करुण पुकार

विजय शर्मा ऐरी

(1)

हे अम्बे जगदम्बे माता, सुन ले मेरी पुकार,

तेरे द्वारे आया माँ मैं, खोल दे सुख के द्वार।

दुख की रातें लंबी हो गईं, जीवन हुआ लाचार,

तेरे चरणों में सिर रखता, कर दे अब उद्धार।

(2)

ममता की तू सागर माता, दया की है खान,

तेरे नाम से मिट जाते हैं, जन-जन के अरमान।

झोली मेरी खाली पड़ी है, भर दे माँ वरदान,

तेरी कृपा से खिल उठेगा, मेरा सूना जहान।

(3)

जब-जब संकट आया माँ, तूने दिया सहारा,

भटके राही को दिखलाया, सच्चा पावन किनारा।

अब भी तेरे भरोसे बैठा, छोड़ सभी का द्वारा,

आजा माँ शेरांवाली, बनकर भाग्य सितारा।

(4)

तेरे मंदिर दीप जले हैं, मन में ज्योति जगा,

तेरे भजनों की धुन सुनकर, मिट जाए हर दगा।

मन के अंधियारे को हर ले, कर दे उजली हवा,

तेरे बिना माँ कौन यहाँ है, जो मेरा दुख सहेगा।

(5)

दुनिया झूठी माया वाली, सब रिश्ते बेकार,

मतलब से सब पास हैं आते, फिर करते इंकार।

तेरा नाम ही सच्चा साथी, देता प्रेम अपार,

माँ तेरे चरणों में मिलता, जीवन का आधार।

(6)

नैना मेरे राह निहारें, कब आएगी माँ,

सूखे होंठ पुकार रहे हैं, सुन जाएगी माँ।

तेरे बिना सूना हर कोना, वीरान हुई छाँव,

आकर अपनी गोद में भर ले, मिट जाए हर घाव।

(7)

तेरी शक्ति से पर्वत डोले, सागर भी झुके,

तेरे नाम से राक्षस भागें, संकट सारे रुके।

ऐसी दयामयी भवानी, क्यों भक्तों से रुके?

करुण पुकार सुनो माँ मेरी, अब चरणों में थमे।

(8)

विजय शर्मा तेरी शरण में, गाता तेरा नाम,

हर जन्मों में देना माता, चरणों का विश्राम।

जब तक साँस चले ये तन में, जपूँ तेरा धाम,

करुण पुकार सुनो जगदम्बे, पूरा कर अरमान।

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