साधारण कामों का जादू
कविता: विजय शर्मा एरी
---
1
जूते के फीते को थामो ज़रा,
दो धागों में छिपा है जीवन का सहारा।
धीरे-धीरे उन्हें जोड़ो साथ,
यही है संघर्ष और सफलता की बात।
---
2
एक गाँठ बाँधो, कसकर सही,
जैसे रिश्तों में धैर्य रहे सदा वही।
छोटी सी क्रिया, पर गहरी सीख,
हर कदम में छिपा है जीवन का लेख।
---
3
दीपक जलाना भी आसान लगे,
पर अंधेरे में यही उजाला जगाए।
स्विच दबाना साधारण काम,
पर यही बनता है उम्मीद का नाम।
---
4
कॉफ़ी का प्याला भरना रोज़ाना,
सुगंध से भर जाता है सारा ज़माना।
एक साधारण घूँट, पर शक्ति अपार,
थकान मिटाकर दे नया विचार।
---
5
जूते बाँधना, दीपक जलाना,
कॉफ़ी भरना—सबक सिखाना।
छोटे कामों में छिपा है राज़,
जीवन का यही है सबसे बड़ा अंदाज़।
---
6
लोग कहते हैं ये सब मामूली हैं,
पर यही तो जीवन की असली डोरी हैं।
हर दिन की आदतें, हर रोज़ की रीत,
बनाती हैं इंसान को मजबूत और जीत।
---
7
फीते की गाँठ हमें अनुशासन सिखाए,
दीपक की लौ हमें उम्मीद दिलाए।
कॉफ़ी की चुस्की हमें ऊर्जा दे,
ये साधारण काम हमें जीवन सिखाए।
---
8
जो इन्हें हल्के में लेते हैं,
वो जीवन की गहराई खो देते हैं।
छोटे कामों में छिपा है ज्ञान,
यही है जीवन का सबसे बड़ा दान।
---
9
हर साधारण क्रिया में छिपा है ध्यान,
हर रोज़ का काम है साधना महान।
जो समझे इनका महत्व सही,
वही पाए जीवन की रोशनी।
---
10
तो बाँधो जूते, जलाओ दीप,
भर लो प्याला, रखो विश्वास अतीव।
साधारण कामों में छिपा है सबक,
यही है ज़िंदगी का नया चमक।