
“तुम मेरी चाहत…” 🌙
कुछ लोग ज़िंदगी में ऐसे आते हैं
जैसे बारिश से पहले चलने वाली ठंडी हवा…
जो बिना छुए भी
रूह तक महसूस हो जाती है।
तुम भी कुछ वैसे ही थे।
ना कोई शोर,
ना कोई बड़ी शुरुआत…
बस एक दिन
मेरी खामोश दुनिया में
तुम्हारी मुस्कुराहट ने दस्तक दी थी।
और फिर धीरे-धीरे…
मेरी आदतें बदलने लगीं।
चाय पहले भी पसंद थी मुझे,
पर अब हर शाम
उसमें तुम्हारी बातों का स्वाद घुलने लगा था।
बारिश पहले भी होती थी,
लेकिन अब हर बूंद
तुम्हारा नाम लिखकर गिरती महसूस होती।
तुम्हें शायद कभी एहसास भी ना हो
कि तुम्हारे “कैसी हो?” में
मेरे पूरे दिन की खुशी छिपी होती थी।
मैंने चाहा भी तो नहीं था तुम्हें…
बस तुम्हें सुनते-सुनते,
तुम्हें महसूस करते-करते
दिल ने चुपके से तुम्हें अपना बना लिया।
तुम मेरी वो अधूरी दुआ थे
जिसे मैंने कभी ज़ुबान से नहीं मांगा,
लेकिन हर रात
आंखें बंद करते ही
खुद-ब-खुद तुम्हारा चेहरा सामने आ जाता था।
और सबसे खूबसूरत बात जानते हो?
तुम्हें पाने की ज़िद नहीं थी मुझे…
बस ये चाहत थी कि
जब भी तुम मुस्कुराओ,
उस मुस्कान की वजह में
कहीं थोड़ा सा मेरा नाम भी हो। ✨