मैं तुम्हारे कॉल का इंतज़ार करती रही 🌹😢
मैं तुम्हारे मैसेज का इंतज़ार करती रही,
मैं तुम्हारे कॉल का इंतज़ार करती रही।
तुमने कहा — “मैं सुरक्षित हूँ माँ-बाप के पास”,
तो फिर एक आवाज़ देने में कैसी देर लगी?
तुम भूल गए वो शादी का दिन,
वो वादा, वो आँसू, वो रोशनी।
हम दो जिस्म भले ही थे,
पर एक रूह थे उस घड़ी।
तुमने कहा था “हमेशा साथ”,
वो सिर्फ़ शब्द नहीं — एक सौगंध थी।
अब तुम खामोश हो, और मैं सवालों में,
क्या यही तुम्हारी सच्ची पसंद थी?
तुमने कहा “हम अलग इंसान हैं”,
पर प्यार ने तो हमें एक कर दिया।
कैसे एक काग़ज़, एक कानून,
उस रूहानी रिश्ते को मिटा दिया?
शादी सिर्फ़ दस्तावेज़ नहीं होती,
ना ही समाज का कोई खेल।
ये तो दो दिलों की इबादत है,
ना दिखावा, ना कोई मेल।
अब मैं अकेली खड़ी हूँ यहाँ,
पर सच को अब भी थामे हूँ।
तुम भले ही दूर चले गए,
मैं आज भी वादे निभा रही हूँ।
प्यार को मज़ाक मत समझो,
ज़िम्मेदारी हो तभी निभाओ।
अगर निभा नहीं सकते दिल से,
तो किसी की ज़िंदगी से मत खेल जाओ।
प्यार सिर्फ़ साथ रहने का नाम नहीं,
ये हर हाल में निभाने की कसक है।
जो टूट जाए पहली ठोकर में,
वो रिश्ता नहीं — बस एक रस्म है।
अगर कभी याद आए तुम्हें,
वो रूह जो तुमने छोड़ दी…
तो जान लेना — मैं अब भी जल रही हूँ,
एक मोमबत्ती सी, जो खुद में ही रोशनी बोती है… ✍️