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ख़्याल रखना

"ख़्याल रखना"
"ख़्याल रखना" था उसे लेकिन
"ख़्याल रखना" लिखकर वो
मुझे जिम्मेदार बना गया
दो शब्द लिखकर वो
अपनी जिम्मेदारी पूरी कर गया
और मेरे हिस्से का काम बढ़ा गया
ना लिखता वो यह दो शब्द तो
नादानी और अल्हड़पन से दोस्ती करके
जीवन को "जी" से जीती लेकिन
लिखकर "ख़्याल रखना"
वो मुझको संजीदा बना गया
आया तो मेरे हिस्से, वो मुट्ठी भर भी नहीं
लेकिन खाली मुझे, झोली भर,, कर गया
साथ कभी दो कदम, ना चला हाथ पकड़कर
और तन्हा सफर हिस्से मेरे, ताउम्र का कर गया
कभी सीने से लगाया भी नहीं उसने लेकिन
तन्हाई उम्र भर की, मुझसे लिपटा कर गया
समझ को समझ नहीं आता और
दिल समझना नहीं चाहता कि
वो मुझे पूरा कर गया या अधूरा कर गया
लिखकर दो शब्द "ख़्याल रखना"
वो शख्स "शख्सियत" मेरी बदल गया
- कृष्णगामी

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