रिश्तों की डोर
कलाई पर बंधा ये धागा,
सिर्फ धागा नहीं होता,
बहन के मन की दुआओं में,
भाई का हर सपना होता।
बचपन की वो मीठी शरारत,
वो लड़ना और मनाना,
छोटी-छोटी बातों पर रूठना,
फिर हँसकर गले लग जाना।
समय भले ही बदल जाए,
दूरियाँ चाहे बढ़ जाएँ,
पर भाई-बहन के रिश्ते की,
यादें कभी न मिट पाएँ।
भाई की हर मुश्किल में बहन,
बनकर हिम्मत साथ रहे,
बहन की आँखों में आँसू हों,
तो भाई उसका हाथ रहे।
न धन चाहिए, न कोई उपहार,
बस रिश्ते में विश्वास रहे,
हर जन्म मिले ऐसा भाई,
हर जन्म ऐसी बहन साथ रहे।
राखी का ये पावन पर्व,
यही संदेश सुनाता है—
सच्चे रिश्तों की डोर को,
समय भी तोड़ नहीं पाता है।
“राखी का धागा छोटा सही,
पर इसमें संसार समाया है;
भाई-बहन के इस रिश्ते में,
पूरा जीवन मुस्कुराया है।”
By- Raj Nibhish