दोस्त एक साथी है,
हाँ मैं कहता हूँ।
मैं हूँ दीपक तो दोस्त एक बाती है,
हाँ मैं कहता हूँ।
साथ होता है तू, तो हर ग़म सह लेता हूँ,
कुछ खुशियाँ, कुछ यादें… सब जी लेता हूँ।
गाँव की वो गलियाँ, हमारी नादानियाँ,
याद करके अक्सर मैं रो लेता हूँ।
दोस्त एक साथी है,
हाँ मैं कहता हूँ…
जब-जब तेरी वो बातें याद आती हैं,
तेरे साथ की हर मुलाकात याद आती है।
घूमना-फिरना, वो हँसना-बतियाना,
हर छोटी-सी सौगात याद आती है।
एक पल को ये सोचकर डर जाता हूँ,
फिर खुद को मैं धीरे से समझाता हूँ।
चल छोड़… मैं तो उसे याद करता हूँ,
दिल में ही सब कुछ छुपा लेता हूँ।
साथ-साथ चलने को मैं उससे कहता हूँ,
दोस्त एक साथी है…
हाँ मैं कहता हूँ।
दूर हूँ उससे, फिर भी पास उसके हूँ,
ये दिल से हर बार मैं कहता हूँ।
वो भी खास है मेरे लिए उतना ही,
जितना मैं उसके लिए रहता हूँ।
इसी तरह सारा दर्द सीने में पी लेता हूँ,
दोस्त एक साथी है…
हाँ मैं कहता हूँ।
✍️- संदीप यादव