
मेरा नाम संदीप है, और मैं बचपन से ही शरारती रहा हूँ। बचपन की यादें कभी नहीं भुलाई जा सकतीं। दोस्तों के साथ नए-नए खेल खेलना और मस्ती करना, यही तो असली मजा था। जैसे-जैसे वक्त बीतता गया, हमारा बचपन धीरे-धीरे खोता गया। बड़े होने पर घर की परेशानियाँ और पढ़ाई का तनाव हमें घेरने लगा।
इसी बीच, एक दिन मुझे सिर में ब्रेन ट्यूमर नाम की बीमारी हो गई। मम्मी-पापा दोनों बहुत परेशान रहने लगे। घर वाले मुझे हर जगह दिखाने ले जाने लगे, लेकिन कहीं से भी अच्छी खबर नहीं मिली। जहां भी जाते, डॉक्टर एक ही बात कहते, "हमारा इलाज नहीं होगा।" उनकी ये बातें सुनकर मम्मी का बुरा हाल हो जाता।
आगे की कहानी अगले पार्ट में।