खामोशी में बिछड़ना
हमने कभी सोचा भी नहीं था,
कि हमारी कहानी यूँ ख़त्म होगी—
न कोई शोर, न कोई इल्ज़ाम,
बस खामोशी की चादर में लिपटी हुई दूरी होगी।
न कोई बड़ी लड़ाई हुई,
न कोई आख़िरी अलविदा…
बस दो दिल थे,
जो धीरे-धीरे
एक-दूसरे से दूर होते गए।
बातें धुंध में खोती गईं,
कोशिशें थमती गईं,
और उन सब के बीच कहीं—
हमने वो “हम” खो दिया,
जो कभी हमारी पहचान था।
मैं उम्मीदों को थामे रहा,
कि शायद सब ठीक हो जाएगा,
हम फिर पहले जैसे हो जाएंगे…
मगर कुछ रिश्ते,
वक़्त के साथ नहीं,
खामोशी के साथ खत्म हो जाते हैं।
शायद हम गलत नहीं थे,
बस एक-दूसरे के लिए
हमेशा के लिए बने ही नहीं थे।
और अब…
जो बाकी है,
वो कुछ धुंधली यादें हैं,
कुछ अधूरी बातें,
और एक कहानी—
जो बिना आवाज़ के,
यहीं कहीं खत्म हो जाती है… ❤️
मर्म (Moral):
हर रिश्ता शोर में नहीं टूटता—कुछ खामोशी में बिखर जाते हैं, इसलिए जब तक साथ हो, उसे पूरी सच्चाई और कोशिश से निभाओ।