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प्यार निभाने का, ये सिलसिला कभी न छूटे.....

अपनी कलम से,

      प्यार निभाने का,

                ये सिलसिला कभी न छूटे.....

   कोशिश यही रहे, कोई दिल से कभी न रूठे,

             ज़िंदगी की  राह में, अपनों का साथ न छूटे!

   रिश्ते जो भी मिलें, उन्हें श्रद्धा से जो सँवारूँ,

             भावनाओं की यह कोमल डोर,कहीं न छूटे!

   सुख हो या संघर्ष, कंधा से कंधा मिला चलूं,

             विश्वास की नींव, कभी बन कमजोर न छूटे!

   शब्दों में अपने स्नेह हो, कर्मों में हो सच्चाई,

            मेरे स्वभाव से किसी का भी,विश्वास न छूटे!

   अगर समय बदल जाए,हालात भी रूखे हों,

            प्रेम का उगा सूरज, मन के आँगन से न छूटे!

   गलती हो जाए मुझसे, तो शीश झुका लूँ मैं,

           अहंकार की परछाईं, कभी रिश्तों पर न छूटे!

   हँसी बाँटने में दिल मेरा, कभी छोटा न करूँ,

           और दुखों में साथ देने का,ये हौसला न छूटे!

   भीड़ भरी इस दुनियां में,  हर पल इंसान रहूँ,

            संवेदनाओं के स्पर्श कभी,आत्मा से न छूटे!

   यूँ साँसों के संग दुआ,हर दिन जुड़ी रहे सदा,

            अपनापन हर रिश्ते से,ये पहचान से न छूटे!

   आख़िरी पल तक मेरी, बस यही है चाह रहे,

            प्यार निभाने का,ये सिलसिला कभी न छूटे!

ये,सिलसिला कभी न छूटे.....

ये,सिलसिला कभी न छूटे....

*༺꧁🖋️ डॉ. सूर्य प्रताप राव रेपल्ली 🙏꧂༻*

मौलिक व स्वरचित @ सर्वाधिकार सुरक्षित

#motivational quotes

#Author : Poet, Lyrics Writer & Story Writer

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