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सिर्फ तुम्हारे लिए

सिर्फ तुम्हारे लिए

मैंने वो सब किया,

जो मैं कभी नहीं करता…

सिर्फ तुम्हारे लिए।

रातों को नींद से रिश्ता तोड़ दिया,

सिर्फ तुमसे कुछ पल बात करने के लिए।

अपने हर दर्द को मुस्कान में छुपा लिया,

सिर्फ तुम्हारी एक हँसी देखने के लिए।

मैं खुद से भी लड़ता रहा,

हर बार…

ताकि तुम्हें समझ सकूँ,

तुम्हारी खामोशियों को भी आवाज़ दे सकूँ।

मगर तुमने कभी कोशिश ही नहीं की—

कि मेरे अंदर के शोर को सुन सको।

मैंने हद से ज़्यादा परवाह की तुम्हारी,

अपनी हैसियत से बढ़कर तुम्हें दिया,

और तुम्हें उस मुकाम तक चाहा…

जहाँ तक तुमने कभी महसूस भी नहीं किया।

मैं धीरे-धीरे टूटता रहा अंदर से,

हर दिन, हर रात…

और तुम्हें खबर तक नहीं हुई।

आख़िर में सच यही था—

कि इस रिश्ते में सिर्फ मैं था,

जो हर चीज़ महसूस कर रहा था…

उस इंसान के लिए,

जिसे कुछ महसूस ही नहीं हुआ।

और सबसे अजीब बात ये है…

आज भी अगर सवाल उठे—

तो मैं तुम्हें ही चुनूँगा।

क्योंकि मोहब्बत कभी-कभी

हिसाब नहीं करती…

बस खुद को खर्च कर देती है। ❤️

मर्म (Moral):

किसी को इतना भी मत चाहो कि तुम खुद ही पीछे छूट जाओ—सच्ची मोहब्बत वही है जहाँ दोनों एक-दूसरे को महसूस करें।

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