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अरुण कुमार की भूतिया कहानी

में अरुण कुमार आज आपको एक ऐसे घर की कहानी बता ने वाला हूं कि ये एक ऐसे घर की कहानी है जिसमें ना जाने क्या हो रहा था इस घर में ज्यादा वक्त कोई भी रह नहीं सका तो आईए जानते हे कि Kiss तरह अरुण कुमार याने मेने कैसे ये केस सॉल्व किया

ये घर जब अंजली और अमित ने खरीदा तो वो और उसके दो बच्चे राहुल और अंकिता सब बहुत खुश थे क्योंकि उन्हें अब अपना घर मिलने वाला था लेकिन Kiss को पता था कि यहां रहने आने के बाद उनके साथ क्या होने वाला था

जब वो पहले दिन घर में आए यहां बहुत सारा कचरा था तो उन्होंने वो सब साफ किया दोपहर का वक्त हो गया था तो अंजली बोली अमित आज तुम होटल से खाना ले आओ में बहुत थक गई हूं तो अमित खाना लेने होटल चला गया और अंजली आराम करने अपने Room में चली गई और उसके दो बच्चे राहुल और अंकिता वही घर में खेल रहे थे कि एक Room में से कुछ ऐसी आवाज आई आओ मेरे पास आओ मेरे बच्चों ये आवाज सुनकर दोनों थोडे घबराएं और फिर उन्हें ऐसा लगा कि उनकी मम्मी उनसे मजाक कर रही है तो जिस कमरे से आवाज आ रही थी उस कमरे में वो गए वहां कोई नहीं था तो बच्चे वापस खेलने लग गए और थोडी देर में अमित भी खाना लेकर आ गया सब ने खाना खाया और सब आराम करने चले गए

अमित और अंजली एक कमरे में थे और दूसरे कमरे में राहुल और अंकिता आराम कर रहे थे कि थोडी देर में अंजली ने कुछ आवाज सुनी आओ मेरे पास आओ मेरे प्यारे लोगों वो अचानक से उठ गई उसे लगा कि कोई बुरा सपना देखा होगा लेकिन बाद में ऐसी ही आवाज आई अब अंजली थोडी घबराई उसने देखा तो अमित सो रहा था वो आवाज जहां से आ रही थी उस और गई उसने देखा कि आवाज तो अलमारी में से आ रही है जो स्टोर रुम में रखी हुई है वो अलमारी उनकी नहीं थी घर के पुराने सामान के साथ ही थी वो वहां से जाने लगी तभी वापिस आवाज आई मेरे से मिले बिना ही जा रही हो अंजली इतना सुनकर अंजली दौडकर अमित के पास गई और सारी बात बताई अमित ने कहां ये तुम्हारा वहम होगा चलो में आता हूं हम देखते हैं कौन बात करता है दोनों अलमारी के पास गए और देखा तो कोई भी आवाज नहीं आ रही थी और बाद में अमित ने उस अलमारी को खोला तो देखकर हैरान ही रह गया उस अलमारी में तो कोई कचरा या मिट्टी नहीं थी मानो किसी ने इसे अभी ही रखा हो उस अलमारी में लाल रंग की साडी और चूडियां भी थी और एक किताब भी थी जैसे ही अमित किताब को छूने गया तो आवाज आई अमित तुम मेरी जिन्दगी को पढो दोनों वहां से अपने बच्चों को लेकर अपने दोस्त के यहां चले गए और उसे सब बताया तो वो बोला एक शख्स हे जो तुम्हारी मदद कर सकता है

अमित बोला कौन है वो उसका दोस्त बोला उसका नाम अरुण कुमार है वो ऐसे ना जाने कितने केस पर काम कर चुका है तो हम उसके पास जाते है अरुण कुमार के पास जाकर अमित और अंजली ने सारी बात बताई अरुण कुमार बोला आप जो बोल रही हो उससे यहीं लगता है कि कुछ तो है उस घर में जो आप से छुपा हुआ है में ऐसा करता हूं कल हम साथ उस घर में जाएंगे और में अपने तरीके से देखूंगा कि क्या बात है

अगले दिन तीनों उस घर में गए अरुण कुमार जब घर में दाखिल हुआ तो उसको कुछ अजीब सा अनुभव हुआ वो बोला यहां कोई आत्मा है जो आपको यहां रहने नहीं देगी और फिर अरुण कुमार बोला चलो मुझे तुम स्टोर रुम में ले चलो जहां वो अलमारी है जब वो तीनों उस अलमारी के पास पहुंचे तो अरुण बोला आप लोग थोडा पीछे हो जाइए अब अरुण कुमार ने उस आलमारी को खोला और सारी चीजें देखी और अरुण कुमार बोला ये सारी चीजें देख कर मुझे लग रहा है ये किसी डायन का टोटका है तभी अंजली और अमित बोले अरुण जी इस मुसीबत से आप हमे बचा लीजिए अरुण कुमार बोला में तुम्हें बचा तो लूंगा लेकिन आपको हिम्मत से काम लेना होगा क्या आप तैयार हो इसके लिए

अगले दिन अरुण कुमार पूरी तरह से तैयार हो कर आ गए अंजली और अमित भी आ गए अब अरुण कुमार ने शुरू किया अपना काम वो अलमारी के पास जाकर उसको खोल कर पहले उन्होंने साडी को पकडा उसका रंग लाल था और जैसे ही अरुण कुमार ने साडी को पकडा तो वो लाल रंग उनके हाथ पर खून की तरह चिपक गया और थोडी देर में गायब हो गया अरुण कुमार बोला ये आत्मा की चेतावनी से है बाद में दूसरी सब चीजें देखी तो कुछ नहीं हुआ लेकिन जैसे ही उस किताब को हाथ लगाने अरुण कुमार गया ऐसे ही कमरे में जोर की आवाज गूंजी तुम सब मारे जाओगे कोई नहीं बचेगा अंजली और अमित घबरा गए लेकिन अरुण कुमार का तो यह काम था उन्होंने देखा तो जो साडी उन्होंने पास रखी थी वो तो ऐसी दिख रही थी कि किसीने पहनी हो लेकिन उस साडी में तो कोई भी नहीं था और वो साडी कमरे में चल रही थी और बोल रही थी सब मारे जाओगे कोई नहीं बचेगा अरुण कुमार बोला देखो आप कौन हो ये तुम्हारा नहीं इन दो लोगों का घर है समझी आत्मा बोली क्या कहा ये घर इनका है और जोर जोर से हंसने लगी बाद में पूरे घर में सन्नाटा हो गया

उस कमरे से निकले के बाद अरुण कुमार बोला इस घर में कोई डायन की आत्मा है और वो किताब जो है उसे खोलना ही होगा ताकि हम जान सके की आखिर ये है कौन

अंजली और अमित बोले लेकिन जब भी कोई उस किताब को हाथ लगाने की बात करता है तो आत्मा बहुत ही गुस्से में आ जाती है कही वो आपको चोट ना पहुंचा दे अरुण कुमार बोला इसकी फिक्र आप मत कीजिए ये मेरा काम है में देख लूंगा इतना बोलने के बाद अरुण कुमार उस कमरे में वापस गया और अलमारी को खोलकर वो किताब लेने ही वाला था कि उसको किसी ने जोर का धक्का मारा अरुण कुमार दूर जाके गिरा और बोला यहां जो आत्मा है क्या वो मुझे सुन रही है अगर सुन रही हो तो बताओ क्यों तुम इन लोगों को परेशान कर रही हो क्या कारण है मुझे बताओ शायद में तुम्हारी मदद कर सकूं बाद में कमरे में जोर जोर से हंसने की आवाज आने लगी और अरुण कुमार उस किताब को हाथ में लेकर खोलकर पढने लगा तब कमरे में सन्नाटा हो गया जब अरुण कुमार किताब पढने लगा तो वो किताब किसी पूनम ने लिखी थी जिसे रोज हुए हालत लिखने का शौक था अच्छे हो या बुरे वो डायरी लिखती थी अब आगे जो अरुण कुमार ने पढा वो पूनम की जुबानी से सुने

मेरा नाम पूनम है में यहां अपने काम के लिए आई थी मैने ये घर किराए पर लिया था में खुश थी क्योंकि मुझे अच्छी नौकरी मिल गई थी और ये जगह भी अच्छी थी लेकिन कुछ वक्त के बाद मुझे कुछ महसूस होने लगा कि इस घर में कोई और भी है धीरे धीरे ये जो मुझे महसूस हो रहा था वो एक दिन मेरे सामने आया रात को जब में पानी पीने आई तो देखा यहां कोई मंत्रों का जाप कर रहा है में घबरा गई लेकिन मैं अपनी जगह से चाह के भी जा ना सकी उसने जब अपना चेहरा दिखाया तो में बहुत ही डर गई और फिर वो औरत बोली तुम को किसने बोला था कि यहां मेरे घर में रहने को आओ क्या तुम्हे पता नहीं में कौन हूँ पूनम बोली लेकिन जब में यहां रहने को आई तो घर तो बंद था तो आपका घर कैसे हुआ फिर उसने मेरे चेहरे पर अपना हाथ लगाया और में गिर गई जब आंख खुली तो देखा में स्टोर रुम में थी सामने अलमारी थी उसने खोला और बता कर बोली देख ये साडी ये चूडियां Kiss की है मेरी है और बोली तू भी मेरे टोटके से ही मरेगी पूनम बोली तू भी यानि मेरे से पहले भी किसी को मारा है तुमने तो वो आत्मा बोली देख और मैने देखा तो यहां लाशों के ढेर थे वो आत्मा बोली अभी तेरे पास दस दिन बाकी हैं जीने के लिए लेकिन अब तू मेरे वश में हो जाएगी दस दिन तक तुझे इसी घर में रहना हे और फिर दस दिन पूरे हो गए अभी जब में लिख रही हूं उसके बाद ना जाने वो मेरे साथ क्या करेंगी लेकिन ये आत्मा बहुत ही बुरी और ताकतवर है इसका नाम मनीषा है जिसको भी ये मेरी डायरी मिले वो मेरे घर इस डायरी को लेकर जाए और जानकारी दे की में मर चुकी हूं

आगे क्या हुआ ये हम जानेंगे अगले चेप्टर में धन्यवाद

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