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जिंदगी और चाहत

ज़िंदगी कभी अपनी लगती है,

कभी किसी और की कहानी,

किसी की चाहत में ढलती है,

बन जाती है एक ही निशानी।

दिल की राहों में अक्सर,

एक नाम बस जाता है,

हर ख्वाब उसी का होकर,

रातों को आता है।

ज़िंदगी का मतलब भी,

उसकी चाहत से जुड़ जाता है,

उसके बिना हर पल जैसे,

अधूरा सा रह जाता है।

वक्त की धूप में जलकर,

कुछ रिश्ते निखर जाते हैं,

और कुछ खामोशी बनकर,

दिल में ही ठहर जाते हैं।

उसकी यादों के साए में,

हर लम्हा सिमट सा जाता है,

भीड़ में रहकर भी इंसान,

अकेला सा रह जाता है।

ज़िंदगी कभी अपनी लगती है,

कभी किसी और की कहानी,

किसी की चाहत में ढलती है,

बन जाती है एक ही निशानी।

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