“कैसे मैं फिर से ठीक हो जाऊँ…” 💔
कैसे मैं फिर से ठीक हो जाऊँ,
जब टूटना मेरी गलती ही नहीं था…
जहाँ मुझे उसके सहारे की सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी,
वहीं उसने मेरा हाथ छोड़ दिया…
जहाँ मुझे उसकी समझ की उम्मीद थी,
वहीं उसने अपना असली चेहरा दिखा दिया…
आज भी मैं खामोश हूँ,
क्योंकि मेरा दिल अब भी
उसके लौट आने की उम्मीद लगाए बैठा है…
मैंने लड़ाई चुनना नहीं चाहा,
मैंने तो बस इस रिश्ते को बचाने की कोशिश की थी…
कितना भी दर्द मिला हो,
मैंने कभी उसे बदनाम करना
या उस पर इल्ज़ाम लगाना नहीं चुना…
लेकिन कुछ लोग
मोहब्बत की भाषा समझते ही नहीं,
उन्हें सिर्फ आरोप लगाना आता है…
जिन लोगों ने यह रिश्ता जोड़ा था,
आज वही खामोश खड़े हैं…
सच को समझकर
रिश्तों को बचाने वाला
घर में कोई बड़ा भी नहीं रहा…
अब सारे फैसले
अदालतों में हो रहे हैं,
जहाँ रिश्तों से ज़्यादा
कागज़ों की आवाज़ सुनी जाती है…
वकील, पुलिस…
सब उनके अपने रिश्तेदार जैसे थे…
शायद बाहर के केस कम पड़ गए थे,
इसलिए अब मेरे टूटे हुए रिश्ते को ही
उन्होंने अपनी दुनिया बना लिया…
जब अपने ही लोग खिलाफ खड़े हो जाएँ,
तो कोई इंसान आखिर
कैसे फिर से ठीक हो पाए…
मैंने इस रिश्ते को दिल से अपनाया था,
उसने इसे कागज़ों में तौल दिया…
मैं दरवाज़े पर
उसके कदमों की आहट का इंतज़ार करती रही,
लेकिन मेरी प्रतीक्षा का जवाब
एक तलाक़ का नोटिस निकला…
मेरी नज़रों में शादी
दो आत्माओं का पवित्र बंधन थी,
सिर्फ हाथों का मिलना नहीं,
दिलों और विश्वास का एक हो जाना था…
लेकिन उसके लिए
यह सिर्फ कानून के कागज़ों पर लिखा रिश्ता था,
चाहो तो जोड़ लो,
चाहो तो एक दस्तख़त से तोड़ दो…
आज भी मैं सोचती हूँ —
क्या मोहब्बत इतनी कमज़ोर हो गई है…
या लोगों ने
रिश्तों की कीमत समझनी छोड़ दी है…
रातों में आज भी एक दुआ निकलती है —
“हे ईश्वर,
अगर वो अब मेरा नहीं रहा,
तो कम से कम मुझे इतना मज़बूत बना देना
कि मैं खुद को फिर से पा सकूँ…”
👉संदेश / Moral
रिश्ते अदालतों के फैसलों से नहीं,
दिलों की सच्चाई, सम्मान और विश्वास से चलते हैं…
जो इंसान सच्चे दिल से रिश्ता निभाता है,
वो हारकर भी गलत नहीं होता…
क्योंकि अंत में जीत कागज़ों की नहीं,
चरित्र और इंसानियत की होती है… 🌹