
संघर्षों की सारी गाथा
बाद में कह सुन लेंगे साथी
अभी निरंतर चलना होगा
अभी नहीं हम रुकेंगे साथी
आशा की एक नाव बनाकर
साहस को पतवार बनाकर
पार करें संशय का सागर
और यक़ीनन करेंगे साथी
अभी नहीं हम रुकेंगे साथी
अभी तो विश्वपटल पर हमको
अपनी पहचान बनाना है
अभी पताका विजय की अपने
अम्बर पर फहराना है
मिलकर एक स्वर में फिर हम
जय उद्घोष करेंगे साथी
अभी नहीं हम रुकेंगे साथी
धारा के विपरीत हो बहना
या विष का हो प्याला पीना
शूल भेद दें चाहे सीना
सत्य को सत्य ही कहेंगे साथी
कभी नहीं हम झुकेंगे साथी
:- सीन मीम अहमद