
एक बार एक राजा अपने शहर में लगे मेले में घुमने जाता है
तो राजा देखता है कि एक व्यापारी बाज ( eagle ) के बच्चे बेच रहा है
राजा ने दो (2)बाज के बच्चे खरीद लिए और लाकर अपने बगिचे की देख रेख करने वाले मालि को दे देते हैं देख रेख करने के लिए
कुछ दिनों या कुछ महीनों बाद राजा उन्हें देखने के लिए जाता है ओर देखते हैं कि दोनों बाज के बच्चे बडे़ होकर उड़ रहे हैं
पर कुछ देर बाद देखते हैं कि एक उड़ रहा है ओर एक आकर पेड़ की डाल पर बेठ गया
तब राजा ने माली से पुछा की एक उड़ रहा है ओर एक आकर बैठ गया ऐसा क्यों ?
तब माली ने कहा माहाराज जब से दोनों ने उडना शुरू किया है तब से ऐसा ही हो रहा है
राजा ने घोषणा करवा दी जो भी ईस बाज को उडने वाले बाज के साथ उडायेगा उसे ईनाम दिया जाऐगा
तभी शहर से गाँवों से दुसरे शहरों से विद्वान आऐ सबने अपनी अपनी कोशिश की किसी ने तन्त्र मन्त्र भी किया पर बाज नही उड़ा
पर एक दिन राजा देखता है कि दोनों बाज उड़ रहे हैं तब राजा ने माली से पुछा ये किसने किया तो माली ने कहा राजन ये तो हमारे ही गाँव के एक किसान ने किया है
राजा जी बडे अचंभित होते हुए बोले किसान को दरबार में पेश किया जाए
किसान हाज़िर हुआ तो राजा ने किसान से पुछा की जो कार्य बडे बडे विद्वान नहीं कर पाए वो कार्य आपने केसे किया
किसान बोला राजन जब वो लोग अपना कार्य कर रहे थे तब में उनको देख रहा था
में ऐख रहा था कि वो बाज कुछ देर उड़ता है ओर एक ही पेड़ की उसी एक डाल पर आकर बैठ जाता है
तब मेने उस डाल को ही काट दी जिसका वो आदी हो चुका था वो उडता ओर उसे वो डाल दिखती जिसने उसके मन में आलस्य का घर बना लिया था ईस लिए मेने उस डाल को ही काट दिया
शिक्षा______: आप उस वस्तु को त्याग दो जिसके आप आदि हो चुकें हो
जैसे आप किसी कार्य को ये कहकर टालते हो कि ईसे आज नहीं कल करूँगा ये जो आज नहीं कल करूँगा ये आलस्य की जो बात है इसे आपको अपने मन से हटानी होगी तभी आप वर्तमान में बहतरीन जीवन जी सकते हो
धन्यवाद
लेखक // विनोद कुमावत
लेखक के अपने विचार