रीढ़ या मेरूदंड,न सिर्फ़ किसी प्राणी शरीर का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग है बल्कि उसके सम्पूर्ण व्यक्तित्व का परिचायक है.ये न केवल शरीर को सीधा और संतुलित रखती है अपितु उसे गरिमा और तेजस्विता प्रदान करती है.रीढ़विहीन प्राणी सम्मानित नहीं समझे जाते.मनुष्यों में रीढ़हीनता के विशिष्ट एवं गंभीर आशय हैं जो आत्मसम्मान और मानवीय गरिमा से जुड़े हैं.रीढ़हीन व्यक्ति कितना भी धनी,लोकप्रिय,शिक्षित या उच्चपदस्थ क्यों न हो,सम्माननीय नहीं हो सकता.