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❤️ अपने लोग दर

❤️ अपने लोग 🔥

कुछ दर्द बयां करता हूं।

कुछ दर्द छूपाया करता हूं।

कुछ दर्द बयां करता हूं।

कुछ दर्द छूपाया करता हूं।

आज मेरी जो हालत है।

उस दर्द बयां करता हूं।

ये दर्द भी अपनो ने दिये,

ये दर्द भी अपनो ने दिये

जिस पर भरोसा करता हूं।

पड़ा रहा मखमल शैय्या पर,

सोचा, निंद बहुत आयेगी।..2

तड़पता रहा, दर्द से मगर

सोचा, चैन अब कहां से आयेगी।

सोचा,चैन अब कहां से

आयेगी।

एक तरफ सहोदर भाई।

एक तरफ थी,बैठी माई।

दुसरी तरफ बैठी थी,त्रिया।

तीसरी तरफ रखी थी,दवाई।

तीसरी तरफ रखी थी, दवाई।

ये दुःख दुबारा आया था।

तीन सालों से पुनः छाया था।

दोष किसी को दे नही सकता।

क्योंकि ये दर्द देने वाला भाई, भी न पराया था।

ये दर्द देने वाला भाई भी न पराया था।

वो भी रिश्ता निभा न सका।

अपने को लोभ छुपा न सका।

कैसी दुनियादारी है?

जहां स्वार्थ ही सबसे प्यारी है।

जहां स्वार्थ ही सबसे प्यारी है।

रचनाकार

अरूण कुमार बऊआ

9097792885

किंजर पालीगंज पटना

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