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मेरे होना तुम

तारो की चाहत बनकर चांद आता है,

आकाशगंगाओं में खिलखिलाता है ।

खेतो में पड़े डेले से,

सितारे मुस्कुरा पड़ते है ।

रूह में जब प्रेम उतरता है ,

रोम रोम रोमांचित हो उठता है ।

जैसे नहीं पाल सकता कोई प्रेम,

बिन चांदनी के ,

वैसे ही मेरे होना तुम ।

न पहले ,

न बाद में

सबसे पहले होना तुम ।

हा मेरे होना तुम ।

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