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"चांद के लिए पत्र "

ऐ चांद आज जरा जमीं पर आ,

तुझसे मिलकर जरा गुफ्तगू करनी है।

तुझे गुमान होगा अपनी चांदनी पर,

मेरे पास भी चांद की चांदनी है।

तू भी तो देखें मेरे चांद और चांदनी को,

तब तू बताना,कहां की चांद और

चांदनी,

खूबसूरत है, आसमां की या जमीं की।

चांद तेरी चांदनी तो सिर्फ रात के अंधियारे में,

चांदनी बिखेरती हैं, मेरी चांदनी तो रात के साथ-२,

दिन के उजियारे में भी अपनी चांदनी बिखेरती हैं।

तेरी-मेरी गुफ्तगू में, क्या तू जानना चाहेगा,

कि कौन मेरा चांद और कौन मेरी चांदनी हैं।

अगर तेरा जवाब हां है तो सुन,

जमीं पर हर मां चांद और हर बेटी चांदनी हैं।

Baatcheet(2)

5.0(1)