
एक गाँव में दीपक नाम का एक लड़का रहता था। वह हमेशा शिकायत करता रहता—“मेरे पास सही मौके नहीं हैं, मेरे पास पैसे नहीं हैं, इसलिए मैं कुछ बड़ा नहीं कर सकता।”
गाँव के ही एक बुज़ुर्ग ने एक दिन उसे बुलाया और एक छोटा सा दिया (दीपक) थमा दिया। फिर उसे एक अंधेरे कमरे में ले जाकर कहा, “इस कमरे को रोशन करो।”
दीपक हँस पड़ा, “इतना छोटा दिया इस पूरे कमरे का अंधेरा कैसे दूर करेगा?”
बुज़ुर्ग मुस्कुराए और बोले, “तुम बस इसे जलाओ।”
मन मारकर दीपक ने दिया जलाया। जैसे ही उसने दिया जलाया, कमरे का अंधेरा धीरे-धीरे कम होने लगा। पूरा कमरा तो नहीं, लेकिन जहाँ तक रोशनी पहुँची, वहाँ अंधेरा खत्म हो गया।
बुज़ुर्ग ने कहा, “अंधेरा एक बार में नहीं जाता, लेकिन एक छोटा सा प्रकाश भी उसे चुनौती दे सकता है।”
दीपक चुप हो गया। उसे समझ आ गया कि वह अब तक अंधेरे को देखकर डरता रहा, लेकिन उसने कभी अपना छोटा सा “दीया” जलाने की कोशिश ही नहीं की।
उस दिन के बाद उसने शिकायत करना छोड़ दिया और छोटे-छोटे कदम उठाने शुरू कर दिए।
कुछ सालों बाद वही दीपक गाँव का सबसे सफल व्यक्ति बना—क्योंकि उसने इंतजार नहीं किया, उसने शुरुआत की।
सीख:
आपके पास चाहे कितना भी कम क्यों न हो, शुरुआत करने के लिए वही काफी है।